धारा 41 का मूल पाठ

OCR मिलान: धारा पहचान और उपधारा अंकों की स्रोत-आधारित जाँच की गई। इस धारा में 1 सुधार दर्ज हैं। दो OCR पाठों में 3 अंतर आगे जाँच के लिए हैं। पूर्ण शब्दशः और कानूनी समीक्षा बाकी है।
प्रतिलेखन पढ़ें — समीक्षा बाकी है
यह पाठ मूल चित्र से स्वचालित रूप से पढ़ा गया है (OCR)। अक्षर, अंक या शब्द गलत हो सकते हैं। उद्धरण या कानूनी उपयोग से पहले ऊपर दिए मूल स्रोत से मिलान करें। यह सत्यापित वैधानिक पाठ नहीं है।
41. संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, धारा 37 में विनिर्दिष्ट निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए दोषकर्ता की मृत्यु या अन्य अपहानि स्वेच्छया कारित करने तक का है, यदि वह अपराध जिसके किए जाने के, या किए जाने के प्रयत्न के कारण उस अधिकार के प्रयोग का अवसर आता है, इसमें इसके पश्चात् प्रगणित भांतियों में से किसी भी भांति का है, अर्थात्:-
(क) लूट ;
(ख) सूर्यास्त के पश्चात और सूर्योदय के पूर्व गृहभेदन ;
(ग) अग्नि या किसी विस्फोटक पदार्थ द्वारा रिष्टि, जो किसी ऐसे भवन, तंबू या जलयान को की गई है, जो मानव आवास के रुप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग में लाया जाता है ;
(घ) चोरी, रिष्टि या गृह-अतिचार, जो ऐसी परिस्थितियों में किया गया है, जिनसे युक्तियुक्ति रूप से यह आशंका कारित है कि यदि प्राइवेट प्रतिरक्षा के ऐसे अधिकार का प्रयोग न किया गया तो परिणाम मृत्यु या घोर उपहति होगा ।