भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 31 का विषय “सद्भावपूर्वक दी गई संसूचना” है। नीचे मूल स्रोत और प्रतिलेखन उपलब्ध हैं। इस प्रावधान को इसके पूरे पाठ, अपवादों और संबंधित अध्याय के साथ पढ़ें।
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31. सदभावपूर्वक दी गई संसूचना किसी अपहानि के कारण अपराध नहीं है, जो उस व्यक्ति को हुई है, जिसे वह दी गई है, यदि वह उस व्यक्ति के फायदे के लिए दी गई है | दृष्टांत क, एक शल्यचिकित्सक, एक रोगी को सदभावपूर्वक यह संसूचित करता है कि उसकी राय में वह जीवित नहीं रह सकता | इस आघात के परिणामस्वरूप उस रोगी की मृत्यु हो जाती है | क ने कोई अपराध नहीं किया है, यद्यपि वह जानता था कि उस संसूचना से उस रोगी की मृत्यु कारित होना संभाव्य है |
हिंदी स्रोत: 25 दिसंबर 2023 का मूल अधिनियम। अंग्रेज़ी संस्करण का स्रोत 6 अक्टूबर 2025 का है; दोनों संस्करणों की तिथियाँ अलग हैं। बाद के संशोधनों, लागू होने की स्थिति और हिंदी प्रतिलेखन की पूरी समीक्षा बाकी है। स्रोत और समीक्षा स्थिति →