BNS धारा 53 — दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 53 का विषय “दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेरक का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो” है। नीचे मूल स्रोत और प्रतिलेखन उपलब्ध हैं। इस प्रावधान को इसके पूरे पाठ, अपवादों और संबंधित अध्याय के साथ पढ़ें।
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53. जब किसी कार्य का दुष्प्रेरण, दुष्प्रेरक दवारा किसी विशिष्ट प्रभाव को कारित करने के आशय से किया जाता है और दुष्प्रेरण के परिणामस्वरूप, जिस कार्य के लिए दुष्प्रेरक दायित्व के अधीन है, वह कार्य दुष्प्रेके दवारा आशयित प्रभाव से भिन्न प्रभाव कारित करता है, तब दुष्प्रेरक कारित प्रभाव के लिए उसी प्रकार और उसी विस्तार तक दायित्व के अधीन है, मानो उसने उस कार्य का दुष्प्रेरेण उसी प्रभाव को कारित करने के आशय से किया है, परन्तु यह तब जब कि वह यह जानता था कि दुष्प्रेरित कार्य से यह प्रभाव कारित होना सम्भाव्य है ।
दृष्टांत
य को घोर उपहति करने के लिए ख को क उकसाता है | ख उस उकसाहट के परिणामस्वरूप य को घोर उपहति कारित करता है | परिणामतः य की मृत्यु हो जाती है । यहां, यदि क यह जानता था कि दुष्प्रेरित घोर उपहति से मृत्यु कारित होना सम्भाव्य है, तो क हत्या के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है |
हिंदी स्रोत: 25 दिसंबर 2023 का मूल अधिनियम। अंग्रेज़ी संस्करण का स्रोत 6 अक्टूबर 2025 का है; दोनों संस्करणों की तिथियाँ अलग हैं। बाद के संशोधनों, लागू होने की स्थिति और हिंदी प्रतिलेखन की पूरी समीक्षा बाकी है। स्रोत और समीक्षा स्थिति →