धारा 316 का मूल पाठ



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316. (1) जो कोई, सम्पत्ति या सम्पत्ति पर कोई भी आधिपत्य किसी प्रकार से अपने को न्यस्त किए जाने पर उस सम्पत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग कर लेता है या उसे अपने उपयोग में संपरिवर्तित कर लेता है या जिस प्रकार ऐसा न्यास निर्वहन किया जाना है, उसको विहित करने वाली विधि के किसी निदेश का, या ऐसे न्यास के निर्वहन के बारे में उसके द्वारा की गई किसी अभिव्यक्त या विवक्षित वैध संविदा का अतिक्रमण करके बेईमानी से उस सम्पत्ति का उपयोग या व्ययन करता है, या जानबूझकर किसी अन्य व्यक्ति का ऐसा करना सहन करता है, वह आपराधिक न्यास भंग करता है ।
स्पष्टीकरण --जो व्यक्ति, किसी स्थापन का नियोजक होते हुए, चाहे वह स्थापन कर्मचारी भ्रविष्य-निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 952 की धारा ॥7 के अधीन छूट प्राप्त है या नहीं, तत्समय प्रवृत्त किसी विधि द्वारा स्थापित भविष्य-निधि या कुटुंब पेंशन निधि में जमा करने के लिए कर्मचारी-अभिदाय की कटौती कर्मचारी को संदेय मजदूरी में से करता है उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसके द्वारा इस प्रकार कटौती किए गए अभिदाय की रकम उसे न््यस्त कर दी गई है और यदि वह उक्त निधि में ऐसे अभिदाय का संदाय करने में, उक्त विधि का अतिक्रमण करके व्यतिक्रम करेगा तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने यशथापूर्वोक्त विधि के किसी निदेश का अतिक्रमण करके उक्त अभिदाय की रकम का बेईमानी से उपयोग किया है ।
स्पष्टीकरण 2---जो व्यक्ति, नियोजक होते हुए, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 948 के अधीन स्थापित कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा धारित और शासित कर्मचारी राज्य बीमा निगम निधि में जमा करने के लिए कर्मचारी को संदेय मजदूरी में से कर्मचारी- अभिदाय की कटोती करता है, उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसे अभिदाय की वह रकम न््यस्त कर दी गई है, जिसकी उसने इस प्रकार कटोती की है और यदि वह उक्त निधि में ऐसे अभिदाय के संदाय करने में, उक्त अधिनियम का अतिक्रमण करके, व्यतिक्रम करता है, तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने यथापूर्वोक्त विधि के किसी निदेश का अतिक्रमण करके उक्त अभिदाय की रकम का बेईमानी से उपयोग किया है ।
दृष्टांत
(क) क एक मृत व्यक्ति की वसीयत का निष्पादक होते हुए उस विधि की, जो सामान को वसीयत के अनुसार विभाजित करने के लिए उसको निदेश देती है, बेईमानी से अवज्ञा करता है, और उस सामान को अपने उपयोग के लिए विनियोजित कर लेता है | क ने आपराधिक नन््यासभंग किया है ।
(ख) क भांडागारिक है । य यात्रा को जाते हुए अपना फर्नीचर क के पास उस संविदा के अधीन न््यस्त कर जाता है कि वह भांडागार के कमरे के लिए ठहराई गई राशि के दे दिए जाने पर लौटा दिया जाएगा | क उस माल्र को बेईमानी से बेच देता है । क ने आपराधिक
न्यासभंग किया है ।
(ग) क, जो कलकत्ता में निवास करता है, य का, जो दिल्ली में निवास करता है अभिकर्ता है । क और य के बीच यह अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा है कि य द्वारा क को प्रेषित सब राशियां क द्वारा य के निदेश के अनुसार विनिहित की जाएंगी | य, क को इन निदेशों के साथ एक लाख रुपए भेजता है कि उसको कंपनी पत्रों में विनिहित किया जाए | क उन निदेशों की बेईमानी से अवज्ञा करता है और उस धन को अपने कारबार के उपयोग में ले आता है | क ने आपराधिक न्यासभंग किया है ।
(घ) किंतु यदि दृष्टांत (ग) में क बेईमानी से नहीं बल्कि सदभावपूर्वक यह विश्वास करते हुए कि बैंक ऑफ बंगाल में अंश धारण करना य के लिए अधिक फायदाप्रद होगा, य के निदेशों की अवज्ञा करता है, और कंपनी पत्र खरीदने के बजाय य के लिए बैंक ऑफ बंगाल के अंश खरीदता है, तो यद्यपि य को हानि हो जाए और उस हानि के कारण, वह क के विरुद्ध सिविलत्र कार्यवाही करने का हकदार हो, तथापि, यतः क ने, बेईमानी से कार्य नहीं किया है, उसने आपराधिक न्यासभंग नहीं किया है ।
(ड) एक राजस्व अधिकारी, क के पास लोक धन नन््यस्त किया गया है और वह उस सब धन को, जो उसके पास न््यस्त किया गया है, एक निश्चित खजाने में जमा कर देने के लिए या तो विधि द्वारा निर्देशित है या सरकार के साथ अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा द्वारा आबद्ध है | क उस धन को बेईमानी से विनियोजित कर लेता है | क ने आपराधिक न्यासभंग किया है ।
(च) भूमि से या जल से ले जाने के लिए य ने क के पास, जो एक वाहक है, संपत्ति न्यस्त की है | क उस संपत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग कर लेता है | क ने आपराधिक न्यासभंग किया है ।
(2) जो कोई, आपराधिक न्यासभंग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा |
(3) जो कोई, वाहक, घाटवाल, या भांडागारिक के रूप में अपने पास संपत्ति न्न्यस्त किए जाने पर ऐसी संपत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा |
(4) जो कोई, लिपिक या सेवक होते हुए, या लिपिक या सेवक के रूप में नियोजित होते हुए, और इस नाते किसी प्रकार संपत्ति, या संपत्ति पर कोई भी आधिपत्य अपने में न्यस्त होते हुए, उस संपत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा |
(5) जो कोई, लोक सेवक के नाते या बैंकर, व्यापारी, फैक्टर, दलाल, अटर्नी या अभिकर्ता के रूप में अपने कारबार के अनुक्रम में किसी प्रकार संपत्ति या संपत्ति पर कोई भी आधिपत्य अपने को न्यस्त होते हुए उस संपत्ति के विषय में आपराधिक न्यासभंग करता है, वह आजीवन कारावास से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
चुराई हुई संपत्ति प्राप्त करने के विषय में