धारा 27 का मूल पाठ

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27. कोई बात, जो बारह वर्ष से कम आयु के व्यक्ति या विकृत्तचित्त व्यक्ति के फायदे के लिए सदूभावपूर्वक उसके संरक्षक की या विधिपूर्ण भारसाधक किसी अन्य व्यक्ति द्वारा या तो अभिव्यक्त या विवक्षित सम्मति से की जाए, किसी ऐसी अपहानि के कारण, अपराध नहीं है जो उस बात से उस व्यक्ति को कारित हो, या कारित करने का कर्ता का आशय हो या कारित होने की संभाव्यता कर्ता को ज्ञात हो :
परन्तु इस अपवाद का विस्तार,--
(क) साशय मृत्यु कारित करने या मृत्यु कारित करने का प्रयत्न करने पर नहीं होगा ;
(ख) मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के या किसी गंभीर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने से भिन्न किसी प्रयोजन के लिए किसी ऐसी बात के करने पर नहीं होगा जिसे करने वाला व्यक्ति जानता हो कि उससे मृत्यु कारित होना संभाव्य है ;
(ग) स्वेच्छया घोर उपहति कारित करने या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करने पर नहीं होगा, जब तक कि वह मृत्यु या घोर उपहति के निवारण के, या किसी गंभीर रोग या अंगशैथिल्य से मुक्त करने के प्रयोजन से न की गई हो ;
(घ) किसी ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण पर नहीं होगा, जिस अपराध के किए जाने पर इसका विस्तार नहीं है ।
दृष्टांत
क सदभावपूर्वक, अपने शिशु के फायदे के लिए अपने शिशु की सम्मति के बिना, यह संभाव्य जानते हुए कि शल्य क्रिया से उस शिशु की मृत्यु कारित होगी, न कि इस आशय से कि उस शिशु को मृत्यु कारित कर दे, शल्यचिकित्सक द्वारा पथरी निकलवाने के लिए अपने शिशु की शल्यक्रिया करवाता है | क का उददेश्य शिशु को रोगमुक्त कराना था, इसलिए वह इस अपवाद के अंतर्गत आता है ।