BNS धारा 256 — किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को जब्ती से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 256 का विषय “किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति को जब्ती से बचाने के आशय से लोक सेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना” है। नीचे मूल स्रोत और प्रतिलेखन उपलब्ध हैं। इस प्रावधान को इसके पूरे पाठ, अपवादों और संबंधित अध्याय के साथ पढ़ें।
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256. जो कोई, लोक सेवक होते हुए और ऐसे लोक सेवक के नाते कोई अभिलेख या अन्य लेख तैयार करने का भार रखते हुए, उस अभिलेख या लेख की इस प्रकार से रचना, जिसे वह जानता है कि अशुद्ध है लोक को या किसी व्यक्ति को हानि या क्षति कारित करने के आशय से या संभाव्यत: उसके द्वारा कारित करता है यह जानते हुए या किसी व्यक्ति को वैध दंड से बचाने के आशय से या संभाव्यत: उसके द्वारा बचाएगा यह जानते हुए या किसी संपत्ति को ऐसी जब्ती या अन्य भार से, जिसके दायित्व के अधीन वह संपत्ति विधि के अनुसार है, बचाने के आशय से या संभाव्यत: उसके द्वारा बचाएगा या जानते हुए करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
हिंदी स्रोत: 25 दिसंबर 2023 का मूल अधिनियम। अंग्रेज़ी संस्करण का स्रोत 6 अक्टूबर 2025 का है; दोनों संस्करणों की तिथियाँ अलग हैं। बाद के संशोधनों, लागू होने की स्थिति और हिंदी प्रतिलेखन की पूरी समीक्षा बाकी है। स्रोत और समीक्षा स्थिति →