BNS धारा 242 — वाद या अभियोजन में किसी कार्य या कार्यवाही के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 242 का विषय “वाद या अभियोजन में किसी कार्य या कार्यवाही के प्रयोजन से मिथ्या प्रतिरूपण” है। नीचे मूल स्रोत और प्रतिलेखन उपलब्ध हैं। इस प्रावधान को इसके पूरे पाठ, अपवादों और संबंधित अध्याय के साथ पढ़ें।
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242. जो कोई, किसी दूसरे का भिथ्या प्रतिरूपण करता है और ऐसे धारित किए हुए रूप में किसी वाद या आपराधिक अभियोजन में कोई स्वीकृति या कथन करता है, या दावे की संस्वीकृति करता है, या कोई आदेशिका निकलवाता है या जमानतदार या प्रतिभू बनाता है, या कोई भी अन्य कार्य करता है, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
हिंदी स्रोत: 25 दिसंबर 2023 का मूल अधिनियम। अंग्रेज़ी संस्करण का स्रोत 6 अक्टूबर 2025 का है; दोनों संस्करणों की तिथियाँ अलग हैं। बाद के संशोधनों, लागू होने की स्थिति और हिंदी प्रतिलेखन की पूरी समीक्षा बाकी है। स्रोत और समीक्षा स्थिति →