धारा 240 का मूल पाठ

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240. जो कोई, यह जानते हुए, या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए, कि कोई अपराध किया गया है, उस अपराध के बारे में कोई ऐसी सूचना देता है, जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास हो, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से या दोनों से, दंडित किया जाएगा |
स्पष्टीकरण--धारा 238 और धारा 239 में और इस धारा में “अपराध” शब्द के अंतर्गत भारत से बाहर किसी स्थान पर किया गया कोई भी ऐसा कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता तो निम्नलिखित धाराओं अर्थात् धारा 03, धारा 05, धारा 307, धारा 309 की उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4), धारा 30 की उपधारा (2), उपधारा (3), उपधारा (4) और उपधारा (5), धारा 34, धारा 32, धारा 326 के खंड (च) और खंड (छ), धारा 33। की उपधारा (4), उपधारा (6), उपधारा (7) और उपधारा (8), धारा 332 के खंड (क) और खंड (ख) में से किसी भी धारा के अधीन दंडनीय होता ।