BNS धारा 232 — किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकाना
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 232 का विषय “किसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकाना” है। नीचे मूल स्रोत और प्रतिलेखन उपलब्ध हैं। इस प्रावधान को इसके पूरे पाठ, अपवादों और संबंधित अध्याय के साथ पढ़ें।
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232. (1) जो कोई, किसी अन्य व्यक्ति के शरीर, ख्याति या संपत्ति को या किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को जिससे कि वह व्यक्ति हितबद्ध है, कोई क्षति कारित करने की धमकी उस अन्य व्यक्ति को इस आशय से देता है कि वह व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य दे तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा ;
(2) यदि कोई निर्दोष व्यक्ति उपधारा (॥) में निर्दिष्ट मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप मृत्यु से या सात वर्ष से अधिक के कारावास से दोषसिद्ध और दंडादिष्ट किया जाता है तो ऐसा व्यक्ति, जो धमकी देता है, उसी दंड से दंडित किया जाएगा और उसी रीति में और उसी सीमा तक दंडादिष्ट किया जाएगा जैसे निर्दोष व्यक्ति दंडित और दंडादिष्ट किया गया है ।
हिंदी स्रोत: 25 दिसंबर 2023 का मूल अधिनियम। अंग्रेज़ी संस्करण का स्रोत 6 अक्टूबर 2025 का है; दोनों संस्करणों की तिथियाँ अलग हैं। बाद के संशोधनों, लागू होने की स्थिति और हिंदी प्रतिलेखन की पूरी समीक्षा बाकी है। स्रोत और समीक्षा स्थिति →