धारा 217 का मूल पाठ

OCR मिलान: धारा पहचान और उपधारा अंकों की स्रोत-आधारित जाँच की गई। इस धारा में 1 सुधार दर्ज हैं। दो OCR पाठों में 12 अंतर आगे जाँच के लिए हैं। पूर्ण शब्दशः और कानूनी समीक्षा बाकी है।
प्रतिलेखन पढ़ें — समीक्षा बाकी है
यह पाठ मूल चित्र से स्वचालित रूप से पढ़ा गया है (OCR)। अक्षर, अंक या शब्द गलत हो सकते हैं। उद्धरण या कानूनी उपयोग से पहले ऊपर दिए मूल स्रोत से मिलान करें। यह सत्यापित वैधानिक पाठ नहीं है।
217. जो कोई, किसी लोक सेवक को कोई ऐसी सूचना, जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, इस आशय से देता है कि वह उस लोक सेवक को प्रेरित करे या यह सम्भाव्य जानते हुए देता है कि वह उसको उसके द्वारा प्रेरित करेगा कि वह लोक सेवक-
(क) कोई ऐसी बात करे या करने का लोप करे जिसे वह लोक सेवक, यदि उसे उस संबंध में, जिसके बारे में ऐसी सूचना दी गई है, तथ्यों की सही स्थिति का पता होता तो न करता या करने का लोप न करता ; या
(ख) ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग करे जिस उपयोग से किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ हो,
वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । दृष्टांत
(क) क, एक मजिस्ट्रेट को यह सूचना देता है कि य एक पुलिस अधिकारी, जो ऐसे मजिस्ट्रेट का अधीनस्थ है, कर्तव्य पात्नन में उपेक्षा या अवचार का दोषी है, यह जानते देता है कि ऐसी सूचना मिथ्या है, और यह सम्भाव्य है कि उस सूचना से वह मजिस्ट्रेट, य को पदच्युत कर देगा | क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है |
(ख) क, एक लोक सेवक को यह मिथ्या सूचना देता है कि य के पास गुप्त स्थान में निषिद्ध नमक है | वह सूचना यह जानते हुए देता है कि ऐसी सूचना मिथ्या है, और यह जानते हुए देता है कि यह सम्भाव्य है कि उस सूचना के परिणामस्वरूप य के परिसर की तलाशी ली जाएगी, जिससे य को क्षोभ होगा | क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ग) एक पुलिस को, क यह मिथ्या सूचना देता है कि एक विशिष्ट ग्राम के पास उस पर हमला किया गया है और उसे लूट त्रिया गया है | वह अपने पर हमलावर के रुप में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लेता | किन्तु वह जानता है कि यह संभाव्य है कि इस सूचना के परिणामस्वरूप पुत्रिस उस ग्राम में जांच करेगी और तल्राशियां लेगी, जिससे ग्रामवासियों या उनमें से कुछ को क्षोभ होगा | क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है |