धारा 212 का मूल पाठ


OCR मिलान: धारा पहचान और उपधारा अंकों की स्रोत-आधारित जाँच की गई। इस धारा में 1 सुधार दर्ज हैं। दो OCR पाठों में 12 अंतर आगे जाँच के लिए हैं। पूर्ण शब्दशः और कानूनी समीक्षा बाकी है।
प्रतिलेखन पढ़ें — समीक्षा बाकी है
यह पाठ मूल चित्र से स्वचालित रूप से पढ़ा गया है (OCR)। अक्षर, अंक या शब्द गलत हो सकते हैं। उद्धरण या कानूनी उपयोग से पहले ऊपर दिए मूल स्रोत से मिलान करें। यह सत्यापित वैधानिक पाठ नहीं है।
212. जो कोई, किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते, किसी विषय पर सूचना देने के लिए विधिक रूप से आबदध होते हुए, उस विषय पर सच्ची सूचना के रूप में ऐसी सूचना देता है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का कारण उसके पास है,--
(क) वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ;
(ख) वह सूचना, जिसे देने के लिए वह विधिक रूप से आबदूध है, कोई अपराध किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के
प्रयोजन से, या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो वह दोनों में से,
किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से,
या दोनों से, दंडित किया जाएगा |
दृष्टांत
(क) क, एक भू-धारक, यह जानते हुए कि उसकी भू-सम्पदा की सीमाओं के अंदर एक हत्या की गई है, उस जिले के मजिस्ट्रेट को जानबूझकर यह मिथ्या सूचना देता है कि मृत्यु सांप के काटने के परिणामस्वरूप दुर्घटना से हुई है | क इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है ।
(ख) क, जो ग्राम चौकीदार है, यह जानते हुए कि अनजाने लोगों का एक बड़ा गिरोह य के घर में, जो पड़ोस के गांव का निवासी एक धनी व्यापारी है, डकैती करने के लिए उसके गांव से होकर गया है और निकटतम पुलिस थाने के अधिकारी को उपरोक्त घटना की सूचना शीघ्र और ठीक समय पर देने के लिए विधिक रूप से आबदूध होते हुए, पुलिस अधिकारी को जानबूझकर यह मिथ्या सूचना देता है कि संदिग्ध शील्र के ल्रोगों का एक गिरोह किसी भिन्न दिशा में स्थित एक दूरस्थ स्थान पर डकैती करने के लिए गांव से होकर गया है | यहां क, इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है ।
स्पष्टीकरण--धारा 2| में और इस धारा में, “अपराध” शब्द के अंतर्गत भारत से बाहर किसी स्थान पर किया गया कोई ऐसा कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता, तो निम्नलिखित धारा अर्थात् धारा 403, धारा 05, धारा 307, धारा 309 की उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4), धारा 30 की उपधारा (2), उपधारा (3), उपधारा (4) और उपधारा (5), धारा 34, धारा 32, धारा 326 के खंड (च) और खंड (छ), धारा 33। की उपधारा (4), उपधारा (6), उपधारा (7) और उपधारा (8), धारा 332 के खंड (क) और खंड (ख) में से किसी धारा के अधीन दंडनीय होता ; और “अपराधी” शब्द के अंतर्गत कोई भी ऐसा व्यक्ति आता है, जो कोई ऐसा कार्य करने का दोषी अभिकथित हो |