BNS धारा 210 — दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए विधिक रूप से आबदू्ध व्यक्ति का लोक सेवक को प्रस्तुत करने का लोप
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 210 का विषय “दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए विधिक रूप से आबदू्ध व्यक्ति का लोक सेवक को प्रस्तुत करने का लोप” है। नीचे मूल स्रोत और प्रतिलेखन उपलब्ध हैं। इस प्रावधान को इसके पूरे पाठ, अपवादों और संबंधित अध्याय के साथ पढ़ें।
मूल हिंदी स्रोत · पीडीएफ पृष्ठ 84 · बड़ा करने के लिए चित्र खोलें
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210. जो कोई, किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते किसी दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख को प्रस्तुत करने या परिदत्त करने के लिए विधिक रूप से आबदूध होते हुए, उसको इस प्रकार प्रस्तुत करने या परिदत्त करमे का साशय लोप करेगा,-
(क) वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा ;
(ख) और जहां वह दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख किसी न्यायात्रय में प्रस्तुत या परिदत्त किया जाना हो, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक हो सकेगा, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा |
दृष्टांत
क, जो एक जिला न््यायात्रय के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए विधिक रूप से आबदध है, उसको प्रस्तुत करने का साशय लोप करता है | क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
हिंदी स्रोत: 25 दिसंबर 2023 का मूल अधिनियम। अंग्रेज़ी संस्करण का स्रोत 6 अक्टूबर 2025 का है; दोनों संस्करणों की तिथियाँ अलग हैं। बाद के संशोधनों, लागू होने की स्थिति और हिंदी प्रतिलेखन की पूरी समीक्षा बाकी है। स्रोत और समीक्षा स्थिति →