धारा 19 का मूल पाठ


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19. कोई बात केवल इस कारण अपराध नहीं है कि वह यह जानते हुए की गई है कि उससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, यदि वह अपहानि कारित करने के किसी आपराधिक आशय के बिना और व्यक्ति या संपत्ति को अन्य अपहानि का निवारण या परिवर्जन करने के प्रयोजन से सदभावपूर्वक की गई है |
स्पष्टीकरण--ऐसे मामले में यह तथ्य का प्रश्न है कि जिस अपहानि का निवारण या परिवर्जन किया जाना है, क्या वह ऐसी प्रकृति की थी और इतनी आसन्न थी कि वह कार्य, जिससे यह जानते हुए कि उससे अपहानि कारित होना संभाव्य है, करमे की जोखिम उठाना न्यायानुमत या माफी योग्य था |
दृष्टांत
(क) क, जो एक जलयान का कप्तान है, अचानक और अपने किसी त्रुटि या उपेक्षा के बिना अपने आपको ऐसी स्थिति में पाता है कि यदि उसने जलयान का मार्ग नहीं बदला, तो इससे पूर्व कि वह अपने जल्रयान को रोक सके वह बीस या तीस यात्रियों से भरी नाव ख को अनिवार्यत: टकराकर डुबा देगा, और अपना मार्ग बदलने से उसे केवल दो यात्रियों वाली नाव ग को डुबाने की जोखिम उठानी पड़ती है, जिसको वह संभवत: बचाकर निकल जाए | यहां, यदि क नाव ग को डुबाने के किसी आशय के बिना और नाव ख के यात्रियों को संकट से बचाने के प्रयोजन से सदूभावपूर्वक अपना मार्ग बदल देता है, यद्यपि वह नाव ग को ऐसे कार्य द्वारा टकराकर डुबा सकती है, जिससे ऐसे परिणाम का उत्पन्न होना वह संभाव्य जानता था, तथापि तथ्यत: यह पाया जाता है कि वह संकट, जिसे बचाने का उसका आशय था, जिससे नाव ग को डुबाने की जोखिम उठाना माफी योग्य है, तो वह किसी अपराध का दोषी नहीं है ।
(ख) क, एक बड़े अग्निकांड के समय आग को फैलने से रोकने के लिए घरों को गिरा देता
है । वह इस कार्य को मानव जीवन या संपत्ति को बचाने के आशय से सदभावपूर्वक करता है । यहां, यदि यह पाया जाता है कि निवारण की जाने वाली अपहानि इस प्रकृति की थी और इतनी आसनन थी कि क का कार्य माफी योग्य है, तो क उस अपराध का दोषी नहीं है ।