धारा 130 का मूल पाठ

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130. जो कोई, कोई अंगविक्षेप या कोई तैयारी इस आशय से करता है, या यह सम्भाव्य जानते हुए करता है कि ऐसे अंगविक्षेप या ऐसी तैयारी करने से किसी उपस्थित व्यक्ति को यह आशंका हो जाए कि जो वैसा अंगविक्षेप या तैयारी करता है, वह उस व्यक्ति पर आपराधिक बल का प्रयोग करने ही वाला है, वह हमला करता है, यह कहा जाता है |
स्पष्टीकरण--केवल शब्द हमले की कोटि में नहीं आते हैं | किन्तु जो शब्द कोई व्यक्ति प्रयोग करता है, वे उसके अंगविक्षेप या तैयारियों को ऐसा अर्थ दे सकते हैं जिससे वे अंगविक्षेप या तैयारियां हमले की कोटि में आ जाएं |
दृष्टांत
(क) य पर अपना मुक्का क इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए हिलाता है कि उसके द्वारा य को यह विश्वास हो जाए कि क, य को मारने वाला ही है | क ने हमला किया है ।
(ख) क एक उग्र कुत्ते की मुखबन्धनी इस आशय से या यह सम्भाव्य जानते हुए खोलना आरंभ करता है कि उसके द्वारा य को यह विश्वास हो जाए कि वह य पर कुत्ते से आक्रमण कराने ही वाला है | क ने य पर हमला किया है ।
(ग) य से यह कहते हुए कि “मैं तुम्हें पीटूंगा” क एक छड़ी उठा लेता है | यहां यद्यपि क द्वारा प्रयोग में लाए गए शब्द किसी अवस्था में हमले की कोटि में नहीं आते और यद्यपि केवत्र अंगविक्षेप बनाना जिसके साथ किन्हीं अन्य परिस्थितियों का अभाव है, हमले की कोटि में न भी आए, तथापि शब्दों द्वारा स्पष्टीकृत वह अंगविक्षैप हमले की कोटि में आ सकता है ।